"चिकित्सा समाज सेवा है,व्यवसाय नहीं"

Sunday, 31 May 2015

बेल के औषधीय गुण --- आरती सिंह

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बेल फल उत्तम वायुनाशक, कफ-निस्सारक व जठराग्निवर्धक है। ये कृमि व दुर्गन्ध का नाश करते हैं........इनमें निहित उड़नशील तैल व इगेलिन, इगेलेनिन नामक क्षार-तत्त्व आदि औषधीय गुणों से भरपूर हैं... बेल के फल का रस ठंडा होता है इसका सेवन गर्मियों में करने से लू और गर्मी की दिक्कते नहीं होती है.........ये गर्मियों में जहां आपको राहत देते हैं, वहीं इनका सेवन शरीर के लिए लाभप्रद भी है। बेल में शरीर को ताकतवर रखने के गुणकारी तत्व विद्यमान हैं। इसके सेवन से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह रोगों को दूर भगा कर नई स्फूर्ति प्रदान करता है।
*पुराने से पुराने आँव रोग से छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन अधकच्चे बेलफल का सेवन करें।
* यह डायरिया रोग में काफी लाभप्रद है। यह फल पाचक होने के साथ-साथ बलवर्द्धक भी है।
*पके फल के सेवन से वात-कफ का शमन होता है।
*आँख में दर्द होने पर बेल के पत्त्तों की लुगदी आँख पर बाँधने से काफी आराम मिलता है।
*कई मर्तबा गर्मियों में आँखें लाल-लाल हो जाती हैं तथा जलने लगती हैं। ऐसी स्थिति में बेल के पत्तों का रस एक-एक बूँद आँख में डालना चाहिए। लाली व जलन शीघ्र दूर हो जाएगी।
*बच्चों के पेट में कीड़े हों तो इस फल के पत्तों का अर्क निकालकर पिलाना चाहिए।
*बेल की छाल का काढ़ा पीने से अतिसार रोग में राहत मिलती है।
*इसके पके फल को शहद व मिश्री के साथ चाटने से शरीर के खून का रंग साफ होता है, खून में भी वृद्धि होती है।
*बेल के गूदे को खांड के साथ खाने से संग्रहणी रोग में राहत मिलती है।
*बेल का मुरब्बा शरीर की शक्ति बढ़ाता है तथा सभी उदर विकारों से छुटकारा भी दिलाता है।
*गर्मियों में गर्भवती स्त्रियों का जी मिचलाने लगे तो बेल और सौंठ का काढ़ा दो चम्मच पिलाना चाहिए।
*पके बेल के गूदे में काली मिर्च, सेंधा नमक मिलाकर खाने से आवाज भी सुरीली होती है।
*छोटे बच्चों को प्रतिदिन एक चम्मच पका बेल खिलाने से शरीर की हड्डियाँ मजबूत होती हैं। 
*बेल के फल का गुदा निकल कर उसमे थोड़ी मिश्री मिलाकर ३-४ बार लगातार खाने से आँखों की समस्याओ से रहत मिलती है ।
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Sunday, 24 May 2015

विटामिन और प्रोस्‍टेट की समस्‍या

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पुरुषों में प्रजनन क्षमता घटना एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। लेकिन  क्या आप जानते हैं कि बदलते लाइफस्टाइल के साथ-साथ पुरुषों में घट रहीं प्रजनन क्षमता के लिए कुछ आहार भी जिम्मेदार हैं।
  • 1

    कुछ आहार प्रजनन क्षमता को पहुंचाते हैं नुकसान :

    पुरुषों में प्रजनन क्षमता का घटना आजकल बहुत आम हो रहा है। बदलते लाइफस्टाइल के साथ-साथ पुरुषों में घट रहीं प्रजनन क्षमता के लिए जिम्मेदार कुछ आहार भी हैं। अनजाने में पुरुष कई बार ऐसे आहार का सेवन करते हैं, जिनका प्रतिकूल प्रभाव उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ जाता है। आइये जानते हैं ऐसे ही आहारों के बारे में।

  • 2

    अधिक सोडियम वाले आहार :

    जिस आहार में सोडियम अधिक होता है, उसका पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है। अधिक सोडियम वाला आहार लेने से ब्लड प्रैशर बढ़ सकता है जो बाद में जाकर दिल की बीमारी बन सकता है। सोडियम अंगों में खून के दौरे को कम कर देता है जिससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो जाता है। चीज, स्नैक्स, बेकन, पिकल, सन ड्राई टमैटो, बेकिंग सोडा, नमक, सोया सॉस सोडियम के रिच सोर्स हैं। प्रजनन क्षमता में कमी न आए, इसके लिए इन सब चीज़ों को खाने से बचें।

  • 3

    अधिक ऑयली और सेचुरेटिड आहार :

    ऑयली और सेचुरेटिड खाने की चीज़ों से बचना चाहिए क्योंकि इनसे खराब कॉलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ जाता है। कॉलेस्ट्रॉल काउंट शरीर के मुख्य अंगों में खून के बहाव को प्रभावित करता है, जिससे बाद में जाकर इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है। मीट, अंडे, बटर, सूखा नारियल, चीज, प्रोसेस्ड मीट, व्हिप्ड क्रीम, डार्क चॉकलेट, फिश ऑइल आदि से परहेज करना चाहिए।

  • 4

    अधिक ट्रांस फैट वाले आहार :

    जिन आहारों में ट्रांस फैट होता है उन्हें खाने से बचना चाहिए। ट्रांस फैट से धमनियों में अवरोध पैदा हो सकता है और धीरे-धीरे दिल की बीमारी और इरेक्टाइल डिसफंक्शन का खतरा पैदा हो जाता है। चिप्स, कुकीज, फ्रैंच फ्राइज, मार्जरीन, मफिन्स, केक और दूसरे इस प्रकार के फ्राईड और पैकेज्ड फूड में ट्रांसफैट होता है। प्रजनन क्षमता की कमी से बचने के लिए इस तरह के ट्रांस फैड आहार खाने से बचें।
  • 5

    अधिक अल्कोहल का सेवन :

    इरेक्टाइल डिसफंक्शन से बचने के लिए अल्कोहल से बचना चाहिए। शोधकर्ताओं के मुताबिक एक ग्लास रेड वाइन तक तो ठीक है लेकिन अन्य अल्कोहल ड्रिंक इरेक्टाइल डिसफंक्शन बढ़ाता है।

  • 6

    धूम्रपान :

    दुनियाभर के शोधकर्ताओं ने पाया है कि धूम्रपान से पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।  न केवल प्राइमरी स्मोकर्स में अपितु सेकेंडरी और पैसिव स्मोकर्स में भी इसका बड़ा खतरा है| चाहे आप धूम्रपान करें या आपका पार्टनर लेकिन दोनों में प्रजनन क्षमता पर समान प्रभाव पड़ता है। इससे शुक्राणुओं की संख्या में लगातार कमी होती रहती है।

  • 7

    अधिक चीज़ का सेवन :

    दिन में चीज के तीन से अधिक स्लाइस खाने से युवकों की प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि वसा से भरपूर इस डेयरी आहार की मामूली सी मात्रा भी पुरूषों की प्रजनन क्षमता बाधित कर सकती है।

  • 8

    अधिक शर्करा वाले आहार :

    जिन आहारों में शर्करा की मात्रा अधिक होती है उनसे भी प्रजनन क्षमता में कमी होने का खतरा होता है। डार्क चॉकलेट, डेयरी उत्पादों में शर्करा की मात्रा उच्च होती है। इनका सेवन कम करें।


पुरुषों में प्रोस्‍टेट ग्रंथि पायी जाती है, इस ग्रंथि के सुचारु काम करने से सीनम के निर्माण में मदद मिलती है, इसमें समस्‍या होने पर प्रोस्‍टेट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
  • 1

    विटामिन और प्रोस्‍टेट की समस्‍या:

    बदलते मौसम में पुरुषों में प्रोस्‍टेट की समस्‍या भी बढ़ जाती है, ठंड के मौसम में यह समस्‍या अधिक होती है। विटामिन डी के सेवन से प्रोस्‍टेट के होने की संभावना अधिक रहती है। प्रोस्‍टेट की समस्‍या होने पर पुरुषों को प्रोस्‍टेट कैंसर, प्रोस्‍टेटिक हाइपेथ्रोपी जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है। इसके कारण मूत्र मार्ग अवरुद्ध हो सकता है, इसके कारण पेशाब करने में भी परेशानी होती है। इसलिए इस समस्‍या से बचने के लिए विटामिन का पर्याप्‍त मात्रा में सेवन कीजिए।
  • 2

    प्रोस्‍टेट क्‍या है:

    इसे पौरुष ग्रंथि भी माना जाता है, यह पुरुषों के जनानांगों का अहम हिस्‍सा होता है। यह ग्रंथि अखरोट के आकार की होती है। यह ग्रंथि सीनम निर्माण में मदद करती है, जिससे सेक्‍सुअल क्‍लाइमेक्‍स के दौरान वीर्य आगे जाता है। इस ग्रंथि में सामान्‍य बैक्‍टीरियल संक्रमण से लेकर कैंसर जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं। इसमें समस्‍या होने पर प्रोस्‍टेटिक हाईपेथ्रोफी और प्रोस्‍टेट कैंसर हो सकता है। पहले प्रकार की बीमारी में प्रोस्‍टेट का आकार सामान्‍य अधिक हो जाता है। जबकि प्रोस्‍टेट कैसर में प्रोस्‍टेट ग्रंथि कैंसर ग्रस्‍त हो जाती है।
  • 3

    शोध के अनुसार:

    ठंड के मौसम में अगर शरीर में विटामिन डी की कमी हुई तो इसके कारण प्रोस्‍टेट की समस्‍या हो सकती है। नॉर्थवेस्‍टर्न यूनिवर्सिटी द्वारा किये गये शोध में यह बात सामने आयी। इस शोध की मानें तो विटामिन डी की कमी का असर प्रोस्‍टेट ग्रंथि पर पड़ता है और इसकी कमी से सर्दियों में प्रोस्‍टेट की समस्‍या हो सकती है। जिसके बचाव के लिए विटामिन डी का सेवन बहुत जरूरी है।
  • 4

    विटामिन डी का स्‍तर:

    नॉर्थवेस्‍टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पुरुषों के रक्‍त में विटामिन डी के स्‍तर की जांच की। इसके लिए उन्‍होंने 40 से 79 साल के लोगों का परीक्षण किया। इस शोध के अनुसार जिन लोगों में बॉयोप्‍सी के बाद विटामिन डी का स्‍तर कम देखा गया उनमें बाद में प्रोस्‍टेट कैंसर के होने की संभावना भी बढ़ गई। बढ़ती उम्र के साथ यह समस्‍या भी बढ़ जाती है।
  • 5

    विटामिन डी से कैंसर से बचाव:

    अगर पुरुषों के शरीर में विटामिन डी की कमी नहीं है तो इससे प्रोस्‍टेट कैंसर की कोशिकाओं का विकास नहीं हो पाता है। यानी विटामिन डी कैंसर की कोशिकाओं को विकसित होने से रोकता है। यानी अगर पुरुषों को प्रोस्‍टेट कैंसर जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारी से बचना है तो विटामिन डी का पर्याप्‍त मात्रा में सेवन बहुत जरूरी है।
  • 6

    रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण करता है:

    विटामिन डी प्रोस्‍टेट की संभावना कम हो जाती है। क्‍योंकि यह रक्‍त संचार को सुचारु करता है। इसके अलावा विटामिन डी नई रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायक है, विटामिन डी के पर्याप्‍त सेवन से नई रक्‍त कोशिकायें बनती हैं। शरीर में कोशिकाओं को स्‍वस्‍थ रखने के लिए और प्रोस्‍टेट को सुचारु तरीके से काम करने के लिए नई रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण बहुत जरूरी है।
  • 7

    कितना विटामिन डी है जरूरी:

    विटामिन डी की सही मात्रा रक्‍त कोशिकाओं में मापी जाती है। पुरुषों के रक्‍त में विटामिन डी 30 से 80 नोनोग्राम होनी चाहिए। अगर इसका स्‍तर इससे कम है तो इसके कारण पुरुषों में प्रोस्‍टेट कैंसर होने की संभावना 5 गुना अधिक हो जाती है। इसके अलावा विटामिन डी सूर्य की हानिकारक अल्‍ट्रावॉयलेट किरणों से त्‍वचा कैंसर होने से भी बचाता है। नेशनल हेल्‍थ इंस्‍टीट्यूट नियमित रूप से 600 आईयू विटामिन डी के खपत की सलाह देता है।
  • 8

    विटामिन डी के स्रोत:

    विटामिन डी की कमी दूर करने और अपने प्रोस्‍टेट को बचाने के लिए ऐसे आहार का सेवन कीजिए जिसमें विटामिन डी भरपूर मात्रा में मौजूद हो। इसके लिए सालमन और टूना मछली खायें, मशरूम में भी विटामिन डी होता है। दूध, फलों, सेरेल्‍स में विटामिन डी पाया जाता है। इसके अलावा सूर्य की किरणों में भी पाया जाता है। अगर विटामिन डी की कमी पूरी न हो पाये तो विटामिन डी के सप्‍लीमेंट का सेवन करना चाहिए, यह पूरी तरह से सुरक्षित है। लेकिन सप्‍लीमेंट लेने से पहले अपने चिकित्‍सक से सलाह जरूर लीजिए
  • साभार :
    http://www.onlymyhealth.com/health-slideshow/impotence-in-hindi-7-foods-that-cause-it-1421410084.html?
    http://www.onlymyhealth.com/health-slideshow/important-vitamins-for-your-prostate-in-hindi-1418623803.html? 
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  • फेसबुक पर जगदीश चंद्र जी जो National Centre For Disease Control, Delhi से सम्बद्ध रहे हैं ने इस पोस्ट पर निम्नलिखित बातों को और जोड़ा है ---
विजय राज बाली जी की वाल से ........
सर्वे भवन्तु सुखिनःसर्वे सन्तु निरामयः
जन कल्याणार्थ-जनस्वाथ्य संबंधी आलेखों का संकलन
"चिकित्सा समाज सेवा है,व्यवसाय नहीं"
Sunday, 24 May 2015
विटामिन और प्रोस्‍टेट की समस्‍या
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पुरुषों में प्रजनन क्षमता घटना एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बदलते लाइफस्टाइल के साथ-साथ पुरुषों में घट रहीं प्रजनन क्षमता के लिए कुछ आहार भी जिम्मेदार हैं।
कुछ आहार प्रजनन क्षमता को पहुंचाते हैं नुकसान :
पुरुषों में प्रजनन क्षमता का घटना आजकल बहुत आम हो रहा है। बदलते लाइफस्टाइल के साथ-साथ पुरुषों में घट रहीं प्रजनन क्षमता के लिए जिम्मेदार कुछ आहार भी हैं। अनजाने में पुरुष कई बार ऐसे आहार का सेवन करते हैं, जिनका प्रतिकूल प्रभाव उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ जाता है। आइये जानते हैं ऐसे ही आहारों के बारे में।
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१९७० के दसक में जब जनसत्ता छापना सुरु हुआ कुछ सालों के पश्चात जनसत्ता में एक लेख छपा था की यूरोप में पुरुष और नारी में प्रजनन क्षमता घट रही है, सायद इस दोष का कारण शीघ्र सन्तानुत्पति की इच्छा नहीं होना था, विकास तेजी से हो रहा था और सभी संपन्न थे, इस लिए जवानी के दिनों को स्मृतितियों में संजोने के लिए यह अय्यासी जारी थी, याद नहीं उस समय इस दोष का कारण क्या लिखा था जहां तक मुझे थोड़ा याद है, कि उसमे सायद यही लिखा था कि यूरोप में पुरुष और स्त्रियों का युवा अवस्था से ही सेक्स का खुलापन ही इस दोष का कारण है, जवानी के इस शारीरिक सुख के भोग को वह ब्यर्थ नहीं जाने देना चाहते थे, राजतांत्रिक काल में राजाओं की संतानोत्पति का न होना और बाद में नियोग यज्ञ क्या था , ऋषियों के आम के फल या किसी विशेष प्रकार के फल देने से संतानोत्पति हो ही नहीं सकती यह विज्ञान का नियम है, मनुष्य शरीर की इस प्राकृतिक वातावरण में रहने की एक सीमा है, इसी नियम के तहत शरीर में उत्पन्न होने वाले तमाम पदार्थों की भी एक सीमा हो सकती है, पुरुष के स्पर्म्स और स्त्रिी के गर्भासय में उत्पन होने वाले ओवास की उत्पति की भी एक सीमा हो सकती है, हम समय सीमा में उत्पन्न होकर नष्ट होने वाले इन पदार्थों को ब्यर्थ के भोग विलास में गँवा देते हैं, तो भविष्य के लिए हम क्या उम्मीद करें , और फिर समय बदलने के साथ ही हम पढ़ रहे हैं, कि यूरोप में चाइल्ड एडॉप्शन जोरों से बढ़ने लगा, अमेरिका क्षेत्रफल के अनुसार उसकी आबादी बहुत ही कम है, और अन्य यूरोपीय मुल्कों की भी यही अवस्था है, आज तो दुनिया में टेस्ट ट्यूब बेबी और किराए की कोख सरोगेसी माँ का ज़माना आ गया है, इस लिए दुनिया बदलने लगी है लेकिन इसका भी एक दिन अंत हो जाएगा, आगे क्या होगा यह तो वैज्ञानिक सोच के भविष्य वक्ताओं की सोच के अनुसार भविष्य के गर्भ में छुपा है ?
संदर्भ :
https://www.facebook.com/jagdish.chander.5/posts/597866240316909?pnref=story 

Thursday, 21 May 2015

मोतियाबिंद से बचाव और उपचार---आयुर्वेदिक चिकित्सा

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मोतियाबिंद से बचाव और उपचार:
जब आँख के लैंस की पारदर्शिता हल्की या समाप्त होने लगती है धुंधला दिखने लगता है तो उसे मोतियाबिंद कहते है । इस रोग में आँखों की काली पुतलियों में सफ़ेद मोती जैसा बिंदु उत्पन्न होता है जिससे व्यक्ति की आँखों की देखने की क्षमता कम हो जाती है ज्यादातर यह रोग 40 वर्ष के बाद होता है। मोतियाबिंद उम्र , मधुमेह, विटामिन या प्रोटीन की कमी , संक्रमण, सूजन या किसी चोट की वजह से भी सकता है ।
* मोतियाबिंद से बचाव के लिए सुबह जागने के बाद मुंह में ठंडा पानी भरकर पूरी आँखें खोलकर आंखों पर पानी के 8-10 बार छींटे मारें।
* 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण, आधा चम्मच देसी घी और 1 चम्मच शहद को मिला लें। इसे रोज सुबह खाली पेट ले। इससे मोतियाबिंद के साथ-साथ आंखों की कई दूसरी बीमारियों से भी बचाव होता है।
* मोतियाबिंद से बचने और आँखों की रौशनी तेज करने लिए प्रतिदिन गाजर, संतरे, दूध और घी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।
* एक बूंद प्याज का रस और एक बूंद शहद मिलाकर इसे काजल की तरह रोजाना आंख में लगाएं। आँखों की समस्या शीघ्र ही दूर होगी।
* एक चम्मच घी, दो काली मिर्च और थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार इसका सेवन करें ।
* सौंफ और धनिया को बराबर मात्रा में लेकर उसमें हल्की भुनी हुई भूरी चीनी मिलाएं इसको एक एक चम्मच सुबह शाम सेवन करने से भी बहुत लाभ मिलता है।
* 6 बादाम की गिरी और 6 दाने साबुत काली मिर्च पीसकर मिश्री के साथ सुबह पानी के साथ लेने पर भी मोतियाबिंद में लाभ मिलता है।
* आँखोँ की तकलीफ में गाय के दूध का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए ।
* गाजर, पालक, आंवलें के रस का सेवन करने से मोतियाबिंद 2-3 महीने में कटकर ख़त्म हो जाता है ।
* एक चम्मच पिसा हुआ धनिया एक कप पानी में उबाल कर छान लें ठंडा होने पर सुबह शाम आँखों में डाले इससे भी मोतियाबिंद में आराम मिलता है ।
* हल्दी मोतियाबिंद होने से रोकती है। हल्दी में करक्युमिन नामक रसायन होता है जो रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है और साइटोकाइन्स तथा एंजाइम्स को नियंत्रित करता है।इसलिए हल्दी का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।
* आंखों में मोतियाबिंद और रतौंधी हो जाने पर नीम के तेल को सलाई से आंखों में अंजन की तरह से लगाएं
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Wednesday, 20 May 2015

औषधियों का खजाना है घर का किचन : घर का इलाज

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हमारे घर का किचन औषधियों का खजाना है। कई साधारण चीजें ऐसी हैं जिनका उपयोग करके हम छोटी-मोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स को आसानी से ठीक कर सकते हैं। बस जरूरत है तो रसोई में या हमारे आसपास मौजूद इन चीजों के गुणों व उपयोगों की सही जानकारी की। हमारे पूर्वज प्राचीन समय से ही घरेलू चीजों का उपयोग इलाज के लिए करते आए है। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे ही प्राचीन समय से घरेलू नुस्खों के बारे में जो कि दोहों के रूप में हैं.....
लहसुन की दो टुकड़े, करिए खूब महीन।
श्वेत प्रदर जड़ से मिटे, करिए आप यकीन।।

दूध आक का लगा लो, खूब रगड़ के बाद।
चार-पांच दिन में खत्म, होय पुराना दाद।।

चना चून बिन नून के, जो चौसठ दिन खाए।
दाद, खाज और सेहुआ, बवासीर मिट जाए।।


दूध गधी का लगाइए मुंहासों पर रोज।

खत्म हमेशा के लिए, रहे न बिल्कुल खाज।।
सरसो तेल पकाइए, दूध आक का डाल।
मालिश करिए छानकर, समझ खाज का काल।।

मूली रस में डालकर, लेओ जलेबी खाए।
एक सप्ताह तक खाइए, बवासीर मिट जाए।।

गाजर का पियो स्वरस नींंबू अदरक लाए।
भूख बढ़े आलस भागे, बदहजमी मिट जाए।।

जब भी लगती है तुम्हे भूख कड़ाकेदार।
भोजन खाने के लिए हो जाओ तैयार।।

सदा नाक से सांस लो, पियो न कॉफी चाय।
पाचन शक्ति बिगाड़कर भूख विदा हो जाए।।
प्रात:काल जो नियम से, भ्रमण करे हर रोज।
बल-बुद्धि दोनों बढ़ें, मिटे कब्ज का खोज।।

रस अनार की कली का, नाक बूंद दो डाल।
खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

भून मुनक्का शुद्ध घी, सैंधा नमक मिलाए।
चक्कर आना बंद हों, जो भी इसको खाए।।

गरम नीर को कीजिए, उसमें शहद मिलाए।
तीन बार दिन लीजिए, तो जुकाम मिट जाए।
http://religion.bhaskar.com/news/JM-GN-STM-traditional-home-remedies-4996705-NOR.html
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इन प्वाइंट्स को दबा कर घर बैठे चिकित्सा हासिल की जा सकती है और औषद्धियों के दुष्प्रभाव से भी बचा जा सकता है :

http://www.yourstylishlife.com/the-real-cause-of-pain-how-the-spine-is-connected-with-all-organs/

Wednesday, 13 May 2015

कसरत करें, ब्रेस्ट कैंसर से बचें --- Tauseef Qureshi

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कसरत करें, ब्रेस्ट कैंसर से बचें :
भारत में ब्रेस्ट कैंसर के आधे मामलों का अंत मौत में होता है. अमेरिका और चीन में भारत से कई गुना अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं लेकिन वक्त रहते इलाज मुमकिन होता है. ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।
भारत में स्तन कैंसर के मामलों में सबसे आगे है मुंबई. दूसरे नंबर पर है चेन्नई और उसके बाद बैंगलोर. यह बीमारी पिछले साल 70,000 से अधिक महिलाओं की मौत का कारण बनी. आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं जब तक इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करती हैं, तब तक कैंसर आखिरी स्टेज तक पहुंच चुका होता है. देश में हर 28 में से एक महिला को स्तन कैंसर है. बड़े शहरों की बात करें, तो यह संख्या 22 है.
ब्रेस्ट कैंसर के इतने मामलों के बावजूद इसके बारे में जागरुकता की भारी कमी है. स्तन कैंसर औसतन 50 साल की उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखा गया है. लेकिन चिंता की बात है कि यह उम्र अब घट कर 35 से 40 होती जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक जमाने की तेजी और पश्चिमी जीवनशैली इसके लिए जिम्मेदार हैं.
ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के मौके पर जर्मनी की कैंसर संस्था ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा है कि कसरत के जरिए स्तन कैंसर को रोका जा सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि जो महिलाएं प्रतिदिन 30 से 60 मिनट कसरत करती हैं, उनमें कसरत ना करने वालों की तुलना में स्तन कैंसर का खतरा काफी कम होता है. बॉन स्थित इस गैर सरकारी संस्था ने रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया है कि कसरत से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और वह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने के लिए भी तैयार हो जाता है.
रिपोर्ट तैयार करने के लिए कसरत करने वालों की जीवनशैली पर ध्यान दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार जो महिलाएं नियमित रूप से कसरत करती हैं, वे शराब और सिगरेट का कम सेवन करती हैं. इसके अलावा वे संतुलित आहार लेने पर भी ध्यान देती हैं. इसके विपरीत कसरत ना करने वाली महिलाओं की जीवनशैली काफी अस्वस्थ होती है, जिससे शरीर कमजोर हो जाता है और स्तन कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
वजन का ख्याल और नियमित व्यायाम
ब्रेस्ट कैंसर से बचने के 10 तरीके
वजन का ख्याल और नियमित व्यायाम
अपने शारीरिक भार को संतुलन में रखें. मोटापा अपने आप में एक बीमारी है और कई दूसरी बीमारियों को पैर पसारने का मौका भी देता है. हर दिन औसतन आधे से एक घंटा या फिर हफ्ते में कम से कम चार घंटे कसरत करने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है. नियमित व्यायाम से शरीर की प्रतिरोधी क्षमता और मेटाबोलिज्म भी मजबूत होता है।

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ज्योतिषीय उपचार : 
कैंसर का कारण 'मंगल' और 'शनि'ग्रह होते हैं। किसी भी व्यक्ति के जन्म के समय यदि इन दोनों ग्रहों का परस्पर संबंध स्थापित होता है तो उस व्यक्ति को जीवन में कैंसर होने की संभावना रहती है। यदि शुरू से ही ज्ञात होने पर सतर्कता बरती जाये तो इससे बचाव संभव है। शरीर में कैंसर चाहे किसी भी अंग में हो चिकित्सा के साथ-साथ उसके लिए पश्चिम की ओर मुख करके और धरती से इंसुलेशन बनाते हुये (अर्थात लकड़ी, रेशम या पोलीथीन के आसन पर बैठ कर ) प्रतिदिन 108 बार इन मंत्रों का सस्वर पाठ करना चाहिए :
1)- ॐ अंग अंगारकाय नमः 
2)- ॐ शम शनेश्चराय नमः  
-----(विजय राजबली माथुर )

Friday, 8 May 2015

टी बी कारण और निवारण (भाग-2 ) --- विजय राजबली माथुर

गतांक से आगे :
http://vijaimathur05.blogspot.in/2015/03/blog-post.html 

ज्वर की तीव्रता में निम्न योग अच्छा है :

(1 ) मुक्ता पंचामृत                 - 1 रत्ती 
      पंचानन रस                    - 1 रत्ती 
     अमृता सत्व                   -2 रत्ती 
ऐसी दो मात्राएं मधु ( शहद ) से दें । 

( 2 ) शुद्ध नवसार              - 2 रत्ती 
      अमृतारिष्ट               - 1 टोला 
समान जल मिला कर भोजनोपरांत । 

(3 ) चंद्रामृत रस            -4 रत्ती 
      सितोपलादि           - 1 माशा 
शहद के साथ दें। 

इस अवस्था में 'सर्वज्वर लौह', चंदनादी लौह, कुमुदेश्वर रस का प्रयोग करा सकते हैं। 

रकतीष्ठीवन की अवस्था में निम्न औषद्ध योग लाभ करते हैं: 

(1 ) बसंत मालती             - 1 रत्ती 
     रक्तपित्त कुलकंडन रस - 1 रत्ती 
    शत मूल्यादी लौह           - 2 रत्ती 
    लाक्षा चूर्ण                     - 4 रत्ती 
   सितोपलादि चूर्ण            - 4 रत्ती 
तीन मात्राएं शहद के साथ दें। 

( 2 ) शुद्ध स्वर्ण गैरिक        - 2 रत्ती 
      दुग्ध पाषाण               - 4 रत्ती 
दो मात्राएं । 

( 3 ) उशीराशव              - 1 तोला 
समान जल मिला कर भोजनोपरांत । 
( 4 ) स्वर्ण माक्षिक भस्म     - 1 रत्ती 
      प्रवाल पिष्टि             - 2 रत्ती 
     वासवलेह                 - 1 तोला
रात को एक मात्रा बकरी के दूध से दें। 
( 5 ) एलादी बटी चूसने के लिए दें। 
(6 ) चंदनादि तैल या लाक्षादि तैल  का अभ्यंग (मालिश ) करें। 

यदि रोगी का श्वास फूलता हो तो श्वास कास चिंतामणि, श्वास चिंतामणि, बृहन्मृगांक बटी, महाश्वासारिलौह का प्रयोग करना चाहिए। 
ज्योतिषीय उपचार : 
चंद्र, मंगल व शनि के संयुक्त प्रकोप से TB रोग होता है अतः प्रतिदिन 108 बार पश्चिम की ओर मुख करके व पृथ्वी से इंसुलेशन बनाते हुये (लकड़ी, रेशम या पोलीथीन के आसान पर बैठ कर )इन मंत्रों का जाप करें: 
1- ॐ सों सोमाय नमः 
2- ॐ अंग अंगारकाय नमः 
3- ॐ शम शनेश्चराय नमः