"चिकित्सा समाज सेवा है,व्यवसाय नहीं"

Saturday, 24 May 2014

जौ(Barley),इमली से लू का बचाव :कपूर से दर्द भगाएँ





जौ(Barley) -----
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प्राचीन काल से जौ का उपयोग होता चला आ रहा है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों का आहार मुख्यतः जौ थे। वेदों ने भी यज्ञ की आहुति के रूप में जौ को स्वीकार किया है। गुणवत्ता की दृष्टि से गेहूँ की अपेक्षा जौ हलका धान्य है। उत्तर प्रदेश में गर्मी की ऋतु में भूख-प्यास शांत करने के लिए सत्तू का उपयोग अधिक होता है। जौ को भूनकर, पीसकर, उसके आटे में थोड़ा सेंधा नमक और पानी मिलाकर सत्तू बनाया जाता है। कई लोग नमक की जगह गुड़ भी डालते हैं। सत्तू में घी और चीनी मिलाकर भी खाया जाता है।
जौ का सत्तू ठंडा, अग्निप्रदीपक, हलका, कब्ज दूर करने वाला, कफ एवं पित्त को हरने वाला, रूक्षता और मल को दूर करने वाला है। गर्मी से तपे हुए एवं कसरत से थके हुए लोगों के लिए सत्तू पीना हितकर है। मधुमेह के रोगी को जौ का आटा अधिक अनुकूल रहता है। इसके सेवन से शरीर में शक्कर की मात्रा बढ़ती नहीं है। जिसकी चरबी बढ़ गयी हो वह अगर गेहूँ और चावल छोड़कर जौ की रोटी एवं बथुए की या मेथी की भाजी तथा साथ में छाछ का सेवन करे तो धीरे-धीरे चरबी की मात्रा कम हो जाती है। जौ मूत्रल (मूत्र लाने वाला पदार्थ) हैं अतः इन्हें खाने से मूत्र खुलकर आता है।
जौ को कूटकर, ऊपर के मोटे छिलके निकालकर उसको चार गुने पानी में उबालकर तीन चार उफान आने के बाद उतार लो। एक घंटे तक ढककर रख दो। फिर पानी छानकर अलग करो। इसको बार्ली वाटर कहते हैं। बार्ली वाटर पीने से प्यास, उलटी, अतिसार, मूत्रकृच्छ, पेशाब का न आना या रुक-रुककर आना, मूत्रदाह, वृक्कशूल, मूत्राशयशूल आदि में लाभ होता है।

औषधि-प्रयोगः
धातुपुष्टिः एक सेर जौ का आटा, एक सेर ताजा घी और एक सेर मिश्री को कूटकर कलईयुक्त बर्तन में गर्म करके, उसमें 10-12 ग्राम काली मिर्च एवं 25 ग्राम इलायची के दानों का चूर्ण मिलाकर पूर्णिमा की रात्रि में छत पर ओस में रख दो। उसमें से हररोज सुबह 60-60 ग्राम लेकर खाने से धातुपुष्टि होती है।
गर्भपातः 
जौ के आटे को एवं मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर खाने से बार-बार होने वाला गर्भपात रुकता है।



Tuesday, 20 May 2014

पुदीना,शहद,बेल आदि से प्रकृतिक उपचार

http://religion.bhaskar.com/article/FM-AN-yoga-mint-tea-benefits-4582076-PHO.html
उज्जैन। गर्मी में पुदीना खाने का टेस्ट बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ये एक बहुत अच्छी औषधि भी है यह गर्मी झेलने की शक्ति रखता है। पुदीने को गर्मी और बरसात की संजीवनी बूटी कहा गया है। इसकी स्वाद और सुगंध दोनों ही बहुत लाभदायक है। पुदीना विटामिन-ए से भरपूर होता है। पुदीने की चटनी स्वादिष्ट तो होती ही है, यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है। पुदीने का अर्क दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। 

पुदीना कफ, गैस, उल्टी, पेट दर्द, बुखार, दस्त और मतली में बहुत फायदेमंद होता है। सिरदर्द और त्वचा रोग में लाभकारी होता है। इसीलिए पुदीने के पौधे में कैफीन नहीं होता है। जिसकी वजह से यह बहुत सारे रोगों से लड़ने में भी मदद करता है, आइए जानते हैं पुदीने की चाय पीने से होने वाले फायदों के बारे में ....
- जिन लोगों को गैस व एसिडिटी की समस्या रहती है, उन्हें खाने के बाद एक कप पुदीना चाय पीना चाहिए। इससे पेट दर्द, गैस व एसिडिटी जैसी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

- बस, कार और ट्रेन में चक्कर और मतली कि परेशानी होती है तो इससे बचने के लिए घर से निकलने से पहले एक कप  पुदीने की गर्म चाय पीना चाहिए।
- पुदीना हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाता है, यह दर्द को भी खत्म करता है। साथ ही, पाचन क्रिया को सुधरता है और भोजन को पचाने में भी मदद करता है।

- पुदीना पिंपल्स में बहुत लाभदायक होता है। इसमें मेंथोल होता है जो त्वचा को ठंडक देता है, इसकी शीतलता तैलीय त्वचा को सॉफ्ट बना देती है।

-  स्किन पर जलन की समस्या में पुदीना चाय दवा का काम करती है। यह चकत्ते, जलन, कीड़े के काटने, खुजली और त्वचा में सूजन जैसी त्वचा समस्याओं का इलाज करने में भी सहायक है।
- पुदीने की चाय के नियमित इस्तेमाल से बाल खूबसूरत होने लगते हैं। इसकी चाय में कुछ ऐसे भी गुण होते हैं, जिससे बाल चमकीले और घने हो जाते हैं।

- गर्मी के मौसम में लू लगने से बचने के लिए पुदीने की चटनी को प्याज डालकर बनाएं। अगर इसका सेवन नियमित रूप से किया जाए तो लू लगने की आशंका खत्म हो जाती है।

- नमक के पानी के साथ पुदीने के रस को मिलाकर कुल्ला करें तो गले की खराश और आवाज का भारीपन दूर हो जाता है। आवाज साफ हो जाती है।

- एक गिलास पानी में 8-10 पुदीने की पत्तियां, थोड़ी-सी काली मिर्च और जरा सा काला नमक डालकर उबालें। 5-7 मिनट उबालने के बाद पानी को छानकर पिएं, खांसी, जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी।
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Saturday, 10 May 2014

जल का महत्व,प्रयोग और सम्मान







http://religion.bhaskar.com/article/FM-HL-yoga-benefits-of-drinking-water-4581966-NOR.html

उज्जैन। पानी सिर्फ प्यास नहीं बुझाता है। यह हमारे शरीर के संचालन में योगदान देने वाली सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक है। पानी हमारे शरीर की मेटाबॉलिज्म क्रियाओं में सहयोग करता है। यह हमारे शरीर से हानिकारक रासायनों को बाहर निकालता है। 

मेडिकल साइंस के अनुसार जिस प्रकार नहाने से शरीर के बाहर की सफाई होती है, ठीक उसी प्रकार पानी पीने से शरीर के अंदर की सफाई होती है। एक वयस्क पुरुष के शरीर में पानी उसके शरीर के कुल भार का लगभग 65 प्रतिशत और एक वयस्क स्त्री के शरीर में उसके शरीर के कुल भार का लगभग 52 प्रतिशत तक होता है।

- दिन भर सांस लेने-छोडऩे में ही हम 2-3 कप पानी खर्च कर देते हैं। पसीने के अलावा, पेशाब के रूप में निकला पानी शरीर की गंदगी साफ  करता है। अगर शरीर से करीब 10 फीसदी तरल पदार्थ कम हो जाएं तो डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। यही वजह है कि किडनी को दुरुस्त रखने के लिए भी बार-बार पानी पीना जरूरी है।
 - पतले लोगों के शरीर में ज्यादा पानी होता है, क्योंकि चर्बी (फैट) की तुलना में मांसपेशियों (मसल्स) में पानी धारण करने की क्षमता ज्यादा होती है। इसका मतलब साफ  है कि सेहत और सौंदर्य के लिए पर्याप्त पानी की अहमियत बेहद ज्यादा है
- विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त पानी पीकर आप अपनी त्वचा को चमका सकते हैं और इससे आपका चेहरा भी दमकता नजर आने लगता है। पानी त्वचा का प्राकृतिक पोषक है। यह झुर्रियों से निजात दिलाता है और बेजान त्वचा में चमक पैदा कर देता है।

- मौजूदा जीवन शैली में अक्सर लोग पानी पीने पर पूरा ध्यान नहीं देते। शरीर में पानी कम होने से सिर दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी, थकान और सोचने की शक्ति कम होने जैसी स्थितियां बनने लगती हैं और कई लोगों को काम के दौरान इस बात का आभास ही नहीं हो पाता।
- भोजन करने के 30 मिनट पहले 2 गिलास पानी पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है। सुबह उठने के बाद 1 गिलास पानी पीने से आपके अंदरूनी अंग मजबूत होते हैं।
- पानी हमें गर्मी से बचाता है। अगर आप जरूरत के हिसाब से पानी नहीं पीएंगे तो आपके शरीर का तापमान घातक तरह से बढ़ सकता है। सही तरह से पानी न पीने से शरीर की काम करने की गति घट जाती है, वह थक जाता है और उसका मेटाबॉलिज्म धीमा पडऩे लगता है।

- भोजन को पचाने के लिए हमारा पेट एंजाइम का उत्पादन करता है, जो एसिडिक होते हैं। इसलिण् जब तक  ठीक मात्रा में पानी नहीं पिएंगे, तब तक आपका पेट ठीक नहीं रहेगा और पेट में एसिड बनता रहेगा।
  जो लोग ज्यादा पानी पीते है उनको पथरी होने की संभावना न के बराबर होती है। ज्यादा पानी पीने से शरीर में हानिकारक तत्वों का निष्कासन पसीने और मूत्र के द्वारा हो जाता है।

- सोने से पहले 1 गिलास पानी पीने से आप हार्ट अटैक जैसी परेशानी से बच सकते हैं। नहाने के बाद 1 गिलास पानी पीने से आप कम रक्तचाप से बच सकते हैं।
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हरे-भरे वृक्षों की कटाई के कारण वन समाप्त होते जा रहे हैं और वर्षा चक्र अव्यवस्थित हो चुका है इसी कारण भूमिगत जल-स्तर भी गिर गया है। तमाम इलाकों में घोर पेय जल संकट है। किन्तु धनवान लोग अपनी कार,मोटर साईकिल,स्कूटर,घर का लान,घर के सामने की सड़क धो-धो कर जल की अथाह बरबादी करते हैं। इस प्रवृति को छोडना या फिर सरकारी स्तर पर रोक लगाना चाहिए। 

Tuesday, 6 May 2014

डॉ गणेश की सदाशयता


ककड़ी के फ़ायदे:







ककड़ी के फ़ायदे:

कच्ची ककड़ी में आयोडीन पाया जाता है। ककड़ी बेल पर लगने वाला फल है। गर्मी में पैदा होने वाली ककड़ी स्वास्थ्यवर्ध्दक तथा वर्षा व शरद ऋतु की ककड़ी रोगकारक मानी जाती है। ककड़ी स्वाद में मधुर, मूत्रकारक, वातकारक, स्वादिष्ट तथा पित्त का शमन करने वाली होती है।

उल्टी, जलन, थकान, प्यास, रक्तविकार, मधुमेह में ककड़ी फ़ायदेमंद हैं। ककड़ी के अत्यधिक सेवन से अजीर्ण होने की शंका रहती है, परन्तु भोजन के साथ ककड़ी का सेवन करने से अजीर्ण का शमन होता है।

ककड़ी की ही प्रजाति खीरा व कचरी है। ककड़ी में खीरे की अपेक्षा जल की मात्रा ज़्यादा पायी जाती है। ककड़ी के बीजों का भी चिकित्सा में प्रयोग किया जाता है।

ककड़ी का रस निकालकर मुंह, हाथ व पैर पर लेप करने से वे फटते नहीं हैं तथा मुख सौंदर्य की वृध्दि होती है।

बेहोशी में ककड़ी काटकर सुंघाने से बेहोशी दूर होती है।

ककड़ी के बीजों को ठंडाई में पीसकर पीने से ग्रीष्म ऋतु में गर्मीजन्य विकारों से छुटकारा प्राप्त होता है।

ककड़ी के बीज पानी के साथ पीसकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की त्वचा स्वस्थ व चमकदार होती है।

ककड़ी के रस में शक्कर या मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।
ककड़ी की मींगी मिश्री के साथ घोंटकर पिलाने से पथरी रोग में लाभ पहुंचता है।